एक शुरुआती गाइड

ज्ञान दलाल

ज्ञान दलाल
बिहार सरकार में मंत्री जीवेश मिश्रा पर मंत्री मदन सहनी ने साधा निशाना।

दलाल व रिश्तेदारों के मोह में जकडे भ्रष्ट बीज गोदाम प्रभारी के खिलाफ हंगामा

दलाल व रिश्तेदारों के मोह में जकडे भ्रष्ट बीज गोदाम प्रभारी के खिलाफ हंगामा

माधौगढ़ रामपुरा ,जालौन । किसानों को उत्तम किस्म का बीज निशुल्क उपलब्ध करवा सरकार प्रदेश द्वारा संचालित कृषि उपज को बढ़ाने की योजना को पलीता लगाते हुए भृष्ट बीज गोदाम प्रभारी अपने रिश्तेदारों व दलालों के मोह जाल में फंस कर बेईमानी का नंगा नाच कर रहा है। परिणाम स्वरुप किसानों ने बीज गोदाम पर जंग जमकर हंगामा काट चोर चोर के नारे लगाए।
उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों की तरह विकासखंड रामपुरा क्षेत्र में भी सरकारी बीज गोदाम पर शासन द्वारा लाही चना मसूर बीज का निशुल्क वितरण हो रहा है। पूरे जिले में अन्य बीज गोदामों पर शांतिपूर्ण ढंग से निशुल्क बीज का वितरण हो चुका है अथवा हो रहा है लेकिन विकासखंड रामपुरा के बीज गोदाम प्रभारी गजेंद्र सिंह की स्वार्थी व बेईमानी युक्त वितरण नीति का यह परिणाम निकला कि गत 4 दिन से बीज गोदाम रामपुरा पर आकर किसान पूरा दिन बिताकर खाली हाथ वापस जा रहे हैं व शाम को अनेक मोटरसाइकिलों पर चना व लाही मसूर बीज की किट लदी हुई जाते देख विना बीज पाए किसानो की छाती पर सांप लोट रहा है । गौर तलब यह है कि कुछ दलाल किस्म के लोग दूर बैठै खतौनी,आधार कार्ड , किसान पंजीयन व पासबुक की छायाप्रति संग्रह करते हुए व सूची बनाते देखे जाते है जिन्हे शाम को बीज किट बाटी जाती है। इस संदर्भ में अनेक समाचार पत्रों ने बीज गोदाम प्रभारी गजेंद्र सिंह के काले कारनामा को उजागर किया इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों द्वारा उसके विरुद्ध कोई कार्यवाही न होने से वह अपने भ्रष्टाचार को पुष्पित पल्लवित करता रहा। अन्तोगत्वा आज मंगलवार को किसानों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने गजेंद्र प्रभारी चोर है, गोदाम प्रभारी चोर है के नारों के साथ हंगामा करना शुरु कर दिया। स्थिति बिगड़ने की जानकारी मिलने पर खंड विकास अधिकारी ओम प्रकाश द्विवेदी , थाना अध्यक्ष रामपुरा राजीव कुमार सिंह बैस (पुलिस बल सहित), सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) भारत सिंह ने मौके पर पहुंचकर आक्रोशित किसानों से बात कर स्थिति को सम्हालने का प्रयास किया और शांत रहने की अपील कर सभी पात्र किसानों को बीज उपलब्ध कराने का वादा कर भ्रष्ट बीज गोदाम प्रभारी गजेंद्र सिंह के विरुद्ध संबंधित अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने व कार्यवाही कराने का आश्वासन दिया । विकास खंड अधिकारी ओपी द्विवेदी , थानाध्यक्ष रामपुरा राजीव कुमार सिंह बैस के आश्वासन पर आक्रोशित ग्रामीण किसान बमुश्किल शांत हुए।

ज्ञान दलाल

Jp dalal

हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल। जिन्होंने अपने बयान पर काफी विरोध के बाद खेद जताया है। फोटो साभार: the chopal

हमारे मोदी जी और उनके संगियों ने तो भारत को कब का विश्व गुरु बना दिया होता। पर उनका विरोध करने वाले बनाने ही नहीं दे रहे हैं। ये बेचारे दिन में अठारह-अठारह घंटे मेहनत कर के विश्व गुरु के पदक वाला कोई काम करते हैं , पर दावा करने से पहले ही विरोधी कुछ न कुछ कर के भांजी मार देते हैं।

अब हरियाणा के कृषि मंत्री का ही किस्सा ले लो। बेचारे ने एकदम टॉप क्लास के फलसफे वाला ज्ञान दिया। जो किसान अस्सी दिन से दिल्ली के बार्डरों पर बैठे-बैठे मर गए हैं , उनके मरने में कैसी शहादत और कौन शहीद ? उन्हें तो मरना ही था! घर में रहते तो क्या नहीं मरते!

आंकड़े के हिसाब से दो-ढाई महीने में , दो-ढ़ाई लाख में से , दो-ढाई सौ का मरना तो एकदम नॉर्मल है! और नार्मल मरने का नाते-रिश्तेदार , मुहल्ले-पड़ौस वाले या संगी-साथी अफसोस करें तो करें , संस्कारी पार्टी की सरकार में बैठने वाले अफसोस नहीं कर सकते। हां! दुर्घटना वगैरह में मरने की बात होती तो शायद मोदी जी अफसोस कर भी देते , पर ये तो जानबूझकर कर मरे थे ; जिद पकडक़र सर्दी में बैठे जो थे।

जानबूझकर मरने वालों के लिए काहे का अफसोस ? उल्टे जो बच गए हैं उन्हें शुक्र मनाना चाहिए कि आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए सरकार ने उन पर मुकदमा नहीं ठोक दिया! वर्ना मोदी जी और उनके संगी सरकार में रहते हैं तो कानून के मामले में एकदम जीरो टॉलरेंस में यकीन करते हैं। कोई कॉमेडियन मज़ाक सोचे उससे पहले ही पकड़कर जेल में बंद कर देते हैं , न मज़ाक सोचेगा और न किसी की भावनाओं पर आघात लगेगा। अब कोई कॉमेडियन जेल में डालने के जरा से मजाक से ही कॉमेडी करना छोड़ दे तो क्या इसका भी ठीकरा मोदी जी के ही सिर पर फोड़ा जाएगा।

ख़ैर! कॉमेडियनों को छोड़ें , वैसे भी विश्व गुरु बनना चाहने वाले देश को अलग से कॉमेडियनों की क्या जरूरत ? दर्शन पर लॉटते हैं और दर्शन का निचोड़ यह है कि बार्डर पर सर्दी में बैठा हो या घर पर रजाई में दुबका हो , किसान के लेख में मरना लिखा है , वह तो मरेगा ही! सर्दी से नहीं मरेगा , तो पुलिस की मार से मरेगा , उससे भी नहीं तो कर्ज के बोझ से मरेगा वह भी नहीं तो भूख से मरेगा , पर किसान मरेगा जरूर।

गीता का यह ज्ञान दलाल साहब ने सारी दुनिया के लिए एकदम कैप्सूल में डालकर दे दिया था। पर विरोधियों को मोदी एंड कंपनी का भारत को फिर से विश्व गुरु बनाना कहां मंजूर। किसानों की शहादत के अपमान का शोर मचा दिया। विश्व गुरु के पदक पर दावे की तो छोड़ो , बेचारे दलाल साहब दार्शनिक ज्ञान देने के लिए माफियां मांगते फिर रहे हैं।

पर ये विरोधी तो खुद मोदी जी को भी भारत के लिए विश्व गुरु का पदक जीतकर नहीं लाने दे रहे हैं। मोदी जी ने कैसे विश्व मानवता को एक नयी अवधारणा दी , एक नया विचार दिया! कोरोना को हराने के बाद , मोदी जी ने सारी दुनिया को एक नये और कोरोना से सौ गुने खतरनाक वाइरस की पहचान करायी--आंदोलनजीवी , परजीवी। बेशक , इसमें भी उच्च दर्शन है। विशेष रूप से आंदोलनकारी और आंदोलनजीवी के बहुत ही बारीक भेद में। पर इसमें कोरा दर्शन ही नहीं है। इसमें गहन न्यायशास्त्र भी है , क्योंकि आखिरकार तो यह एक जुर्म का मामला है।

और जो चीज छूत की बीमारी की तरह फैलती है , उसमें जीवविज्ञान से लेकर चिकित्सा विज्ञान तक तो खैर होंगे ही। सब को मिक्सी में डालकर अच्छी तरह घोंटकर मोदी जी ने सारी दुनिया के शासनों की सारी समस्याओं की रामबाण औषधि तैयार की थी! मगर क्या हुआ ? विरोधियों ने आंदोलनविरोधी का हल्ला मचाया सो मचाया , किसानविरोधी का भी हल्ला मचा दिया। मोदी जी को , जी हां मोदी जी को , दो दिन में ही सफाई देनी पड़ी कि वह आंदोलन को तो बहुत ही पवित्र मानते हैं। इतना पवित्र कि ज्ञान दलाल कोई उसे छूकर अपवित्र कर दे , यह उन्हें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है। उसकी पवित्रता की रक्षा के लिए ही तो मोदी जी , आंदोलन का सहारा लेकर जीने वालों को जेल में डालना चाहते हैं। ऐसी पवित्र आत्मा पर भगतसिंह , गांधी जी , सुभाष बोस वगैरह का अपमान करने का आरोप लगाना और वह भी सिर्फ इसलिए कि उन्होंने भी बार-बार आंदोलन किए थे , आंदोलन ही किए थे , घनघोर पाप है। ये सब पवित्र आंदोलनकारी थे , न कि नापाक आंदोलनजीवी।

आंदोलन के चक्कर में मारे जाने वालों को , मोदीजी भी आंदोलनजीवी कैसे कह सकते हैं ? सिंपल है , जो खुद मर जाए , वह जीवी कैसे हो सकता है! और परजीवी होने के लिए बंदे को जीवी तो होना ही चाहिए। फिर भी मोदी जी सफाई देते ही रह गए , पर दुनिया भर के न जाने कैसे-कैसे इंडियाविरोधजीवी जमा हो गए शोर मचाने के लिए। फिर कहां का विश्व गुरु और कहां का पदक !

सच्ची बात यह है कि अब तो ख़बरिया वेबसाइट न्यूज़क्लिक पर प्रवर्तन निदेशालय का छापा ही हमें विश्व रिकार्ड बनाकर विश्व गुरु बनाए तो बनाए। छोटी सी ख़बरिया वेबसाइट पर 113-114 घंटे का छापा , हमें तो लगता है कि विश्व रिकार्ड कहीं नहीं गया है! वर्ना इसके बाद तो किसान आंदोलन के समर्थन के लिए टूल किट केस से लेकर , यूपी में सुंदर पिचाई के खिलाफ केस तक ही हमें , विश्व गुरु का पदक दिलाएं तो दिलाएं। किसी ने सच कहा है , विश्व गुरु बनना नहीं आसां. !

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

बीएसई सेंसेक्स ने पहली बार 46,000 का आंकड़ा छुआ

9 दिसंबर, 2020 को पहली बार सेंसेक्स ने 46000 का आंकड़ा छुआ। गौरतलब है मार्च में देशभर में लॉकडाउन लगने के बार देश की आर्थिक गतिविधियाँ रुक गयी थी, उस दौरान सेंसेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गयी थी। उसके बाद जब लॉकडाउन चरणबद्ध तरीके से हटता गया ज्ञान दलाल तो आर्थिक गतिविधियों में भी तेज़ी आना

नेता हूं, दलाल नहीं- अब नीतीश सरकार के दो मंत्रियों में भिड़ंत

बिहार में जेडीयू के कोटे से मंत्री मदन सहनी ने अपनी ही सरकार की ब्यूरोक्रेसी पर सवाल उठाते हुए इस्तीफे की पेशकश की थी, इस पर भाजपा नेता ने उन्हें तालमेल से आगे बढ़ने की सलाह दी।

नेता हूं, दलाल नहीं- अब नीतीश सरकार के दो मंत्रियों में भिड़ंत

बिहार सरकार में मंत्री जीवेश मिश्रा पर मंत्री मदन सहनी ने साधा निशाना।

बिहार सरकार में समाज कल्याण मंत्री और नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के विधायक मदन सहनी के इस्तीफे की धमकी देने के बाद से ही राज्य में सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कहा जा रहा है कि सहनी की शिकायतों पर अब तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ध्यान नहीं दिया है। इससे पहले उनकी अपनी ही सरकार में मंत्रियों के साथ भी बहस शुरू हो गई। बताया गया है कि जब श्रम संसाधन मंत्री जीवेश मिश्रा ने सहनी को अधिकारियों के साथ तालमेल से मिलने की सलाह दी, तो नाराज सहनी ने उन्हें अपना ज्ञान अपने पास रखने के लिए कह दिया।

क्या बोले थे जीवेश मिश्रा?: बिहार सरकार में श्रम संसाधन मंत्री और भाजपा नेता जीवेश मिश्रा ने मुजफ्फरपुर में शनिवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि मैं जिस विभाग का मंत्री हूं, वहां पर अफसरशाही बिल्कुल नहीं है। हो सकता है कि उनके किसी और मामले में अधिकारियों से नहीं बन रही होगी। उनके इस्तीफे की बात वही अच्छी तरह से बता सकते हैं। लेकिन जनता सरकार को चुनती है और मंत्री को अधिकारियों से सामंजस्य बनाकर काम करना चाहिए, ताकि जनता के हित में कार्य किए जा सकें।

मिश्रा यहीं नहीं रुके, उन्होंने अधिकारियों का बचाव करते हुए कहा कि मैं अफसरों की मनमानी के आरोपों का समर्थन नहीं करता। लेकिन जो अधिकारी मंत्री की बातों की अनदेखी करते हैं, उन्हें नियमों का पालन करना चाहिए। मंत्री जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं। जनता मंत्रियों के जरिए ही काम करवाती है, इसलिए उनकी जवाबदेही ज्यादा होती है, अधिकारियों को यह समझना चाहिए।

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जीवेश मिश्रा पर भड़के मदन सहनी भड़के, बोले- अपनी सीमा में रहें: भाजपा के कोटे से मंत्री बने जीवेश मिश्रा के इस बयान पर मदन सहनी भड़क गए। उन्होंने कहा, ‘भाजपा के मंत्री पूछने वाले कौन होते हैं, उनको दो-दो विभाग मिले हुए हैं, इसलिए वे ज्यादा खुश हैं।” सहनी ने आगे कहा, “हम उन्हें (जीवेश मिश्रा को) जानते हैं, वे जिस धंधे से जुड़े रहे हैं, हम उस धंधे के जानकार रहे हैं। हम राजनीतिक प्राणी हैं, कोई दलाल ज्ञान दलाल नहीं है जो अधिकारी से तालमेल बैठाएंगे। वह अपना ज्ञान अपने तक सीमित रखें। मुझे किसी को सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं है। उन्हें सीमा में रहना चाहिए।”

सहनी के दिल्ली में लालू से मिलने की अटकलें: ब्यूरोक्रेसी से नाराजगी की शिकायतों के बीच मदन सहनी रविवार को दिल्ली में रहेंगे। माना जा रहा है कि उनकी दिल्ली में ऐसे नेताओं से मुलाकात होगी, जो बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर करने का दम रखते हैं। इनमें एक नाम राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का भी सामने आया है। हालांकि, सहनी की तरफ से कहा गया है कि वे निजी कारणों से दिल्ली पहुंचे हैं और सोमवार को लौटकर वे सीएम से मिलने का समय मांगेंगे।

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